वक्फ संशोधन विधेयक: राज्यसभा में आज होगा पेश, सत्ता और विपक्ष की रणनीति पर टिकी निगाहें

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वक्फ संशोधन बिल
वक्फ संशोधन विधेयक: राज्यसभा में आज होगा पेश, सत्ता और विपक्ष की रणनीति पर टिकी निगाहें

नई दिल्ली  । वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में पास होने के बाद आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा। बुधवार को लोकसभा में हुए मतदान में इस विधेयक के पक्ष में 288 और विरोध में 232 मत पड़े। अब राज्यसभा में इसे पारित कराने के लिए सरकार को 119 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। एनडीए गठबंधन के पास 119 सांसद हैं लेकिन बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस जैसी पार्टियों का रुख अहम भूमिका निभा सकता है।

लोकसभा में लगभग 12 घंटे की लंबी बहस के बाद पास हुआ विधेयक–लोकसभा में इस विधेयक पर करीब 12 घंटे तक जोरदार बहस हुई। पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अपने-अपने विचार रखे और कई संशोधन प्रस्तावित किए। आखिरकार सरकार ने बहुमत के आधार पर इसे पारित करा लिया।

राज्यसभा में विधेयक पारित करने के लिए आवश्यक संख्या-राज्यसभा में कुल 236 सदस्य हैं जिसमें बहुमत के लिए 119 सांसदों की जरूरत होगी। बीजेपी के पास 98 सांसद हैं और एनडीए के अन्य सहयोगी दलों को मिलाकर यह संख्या 115 तक पहुंचती है। इसके अलावा छह मनोनीत सांसद भी हैं ऐसे में एनडीए का आंकड़ा 121 तक जा सकता है । राज्यसभा में कांग्रेस के 27 और अन्य विपक्षी दलों के 58 सांसद हैं। जिससे कुल विपक्षी संख्या 85 बनती है। विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक असंवैधानिक है और इससे अल्पसंख्यक समुदाय की संपत्तियों पर खतरा मंडराएगा। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इस विधेयक के जरिए ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। वहीं ओवैसी ने कल इस बिल का जोरदार विरोध किया और इसे सदन में फाड़ दिया।

सत्तापक्ष का तर्क–सरकार का कहना है कि इस विधेयक से वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और विवादों का शीघ्र समाधान निकलेगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह कानून वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता बढ़ाएगा और इससे मुस्लिम महिलाओं को भी लाभ मिलेगा।

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खरगे ने उठाया अपमान का मुद्दा–राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ लोकसभा में आधारहीन आरोप लगाए गए। उन्होंने अनुराग ठाकुर के बयानों की निंदा करते हुए कहा कि यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो अनुराग ठाकुर को इस्तीफा देना चाहिए अन्यथा वे स्वयं इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। इसी के साथ ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद मिर्जा यासूब अब्बास ने कहा कि प्रियंका गांधी को इस विधेयक पर लोकसभा में मौजूद रहना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि जेडीयू और टीडीपी जैसे दलों ने मुस्लिम समाज को निराश किया है। लोकसभा से पास होने के बाद अब यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा । जिसके बाद राज्यसभा पास होने के बाद यह बिल राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।

 

 

 

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